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परमिंदर झोटा की हत्या पर भाजपा का हमला, अनिल सरीन ने पूछा- नशा खत्म क्यों नहीं हुआ?
मानसा में परमिंदर सिंह झोटा की हत्या पर भाजपा नेता अनिल सरीन ने भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार से सवाल किए।
चंडीगढ़ / सत्ता संदेश
पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की मानसा में गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश महासचिव अनिल सरीन ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार नशे पर लगाम लगाने में नाकाम रही है और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं कर पा रही है।
अनिल सरीन ने कहा कि भाजपा का सवाल मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल से है कि सरकार नशे को खत्म करने में सफल नहीं हुई, लेकिन नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की जान चली गई। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर सवाल
भाजपा नेता ने दावा किया कि पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को सुरक्षा मिलने के बजाय कार्रवाई और खतरे का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने परमिंदर सिंह झोटा की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना राज्य में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
मीडिया से बातचीत में सरीन ने पंजाब सरकार की नशा विरोधी मुहिम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा इस घटना की निंदा करती है और दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है।
मानसा में गोली मारकर की गई थी परमिंदर सिंह झोटा की हत्या
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की मानसा में एक मेडिकल स्टोर के मालिक के साथ कथित विवाद के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई। झोटा नशे की बिक्री के खिलाफ आवाज उठाते थे और इस संबंध में सोशल मीडिया पर वीडियो भी साझा करते थे। घटना के बाद पंजाब में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं।
भाजपा नेता अनिल सरीन ने मांग की कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और नशा तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो। इस मामले ने एक बार फिर पंजाब में नशे की समस्या से निपटने और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
SIR पर सुनील जाखड़ का AAP-कांग्रेस पर निशाना, बोले- पंजाब की फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं आई कोई परेशानी
अनिंदिता मित्रा से मुलाकात के बाद जाखड़ ने उठाए सवाल; हरपाल चीमा और भगवंत मान के विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों का किया जिक्र, प्रगट सिंह ने फॉर्म-6 पर मांगा जवाब
चंडीगढ़ / सत्ता संदेश
पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा से मुलाकात के बाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं पर निशाना साधा। जाखड़ ने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में SIR को लेकर विरोध और हंगामा हो रहा है, लेकिन पंजाब में अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद किसी बड़ी परेशानी की बात सामने नहीं आई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पंजाब में प्रक्रिया को लेकर स्थिति सामान्य रही, तो दूसरे राज्यों में इसे लेकर इतना विवाद क्यों हो रहा है।
गौरतलब है कि पंजाब की अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर 2026 को जारी की गई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सूची में कुल 2,01,00,727 मतदाता दर्ज हैं। SIR से पहले दर्ज मतदाताओं की तुलना में अंतिम सूची में करीब 13.60 लाख की कमी आई है, जबकि अगस्त में जारी ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। <Cite refs={[“turn557186search6″,”turn557186search9”]}/>
हरपाल चीमा और भगवंत मान के क्षेत्रों के आंकड़ों का किया जिक्र
सुनील जाखड़ ने अपने बयान में वित्त मंत्री हरपाल चीमा और मुख्यमंत्री भगवंत मान के विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में हुई कमी का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि हरपाल चीमा के क्षेत्र में करीब 1.83 लाख मतदाताओं में से लगभग 3,000 नाम कम हुए, जबकि भगवंत मान के क्षेत्र में 1.57 लाख के आसपास मतदाताओं में से करीब 5,000 नाम कम हुए।
जाखड़ ने कांग्रेस नेताओं के विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों का भी जिक्र किया और कहा कि इन आंकड़ों को सामने रखकर स्थिति को समझना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रगट सिंह पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस को ऐसा अध्यक्ष मिला है, जो किसी मुद्दे पर समझौता नहीं करता। साथ ही उन्होंने नेताओं से चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों को गुमराह नहीं करने और व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को देखने की अपील की।
नोट: विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित आंकड़े सुनील जाखड़ के बयान के अनुसार हैं; इनका स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्रवार सत्यापन उपलब्ध जानकारी में नहीं किया गया है।
फॉर्म-6 को लेकर प्रगट सिंह ने उठाए सवाल
SIR प्रक्रिया और फॉर्म-6 को लेकर कांग्रेस नेता प्रगट सिंह ने कहा कि यदि किसी को फॉर्म-6 से संबंधित कोई समस्या है, तो उसे तथ्यों और उचित प्रक्रिया के आधार पर उठाना चाहिए, न कि केवल हंगामा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई वास्तविक परेशानी थी, तो संबंधित स्तर पर उस पर सवाल उठाए जाने चाहिए थे।
जाखड़ ने प्रगट सिंह को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें अपने आसपास मौजूद ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए, जो उनके मुताबिक उन्हें गलत दिशा में ले जा सकते हैं। दोनों नेताओं की टिप्पणियों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण और उसके आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
नशे के मामले में पिस्टल लाइसेंस पर उठाया सवाल
पंजाब में नशे के मुद्दे पर बोलते हुए सुनील जाखड़ ने एक व्यक्ति के खिलाफ नशे से संबंधित मामले होने के बावजूद उसके पास पिस्टल का लाइसेंस होने पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे हैरानी की बात बताया और कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
जाखड़ ने एक ड्रग इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि उसके बाद आगे की कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने जिस मामले का जिक्र किया, उसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
मोहाली SSP को ED के पत्र पर सरकार को घेरा
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को पत्र लिखकर मामला दर्ज करने की मांग किए जाने के सवाल पर जाखड़ ने पंजाब सरकार की आलोचना की। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे “महाबेईमान सरकार” कहा।
यह जाखड़ की राजनीतिक टिप्पणी है। ED के पत्र, उसमें उल्लिखित आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों या अधिकारियों का पक्ष जरूरी है।
MLA मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को श्री अकाल तख्त साहिब सेक्रेटेरिएट में जाने से रोका
जत्थेदार के आदेश का दिया हवाला, कथित आपत्तिजनक बयानों पर माफी मांगने की मांग; ऐसा न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
अमृतसर / सत्ता संदेश
श्री अकाल तख्त साहिब के सेक्रेटेरिएट में विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को प्रवेश से रोके जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज के पीए जसकरण सिंह ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विधायक को उनकी जाति के कारण नहीं, बल्कि जत्थेदार साहिब के आदेश पर रोका गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्यासपुरा ने पहले श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार और सम्मानित सिख हस्तियों एवं संस्थाओं के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक बयान दिए थे।
जसकरण सिंह ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का सेक्रेटेरिएट किसी व्यक्ति के साथ उसके धर्म, जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव नहीं करता। उनके मुताबिक, विधायक को प्रवेश से रोकने का फैसला उनके कथित बयानों के मद्देनजर लिया गया।
जातिगत भेदभाव के आरोपों पर क्या बोले जसकरण सिंह?
जसकरण सिंह ने अपने पक्ष में दलील देते हुए कहा कि विधायकों के प्रतिनिधिमंडल में दलबीर सिंह टोंग और कुलवंत सिंह पंडोरी भी शामिल थे, जिन्हें सम्मान के साथ अंदर बैठाया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की बात सुनी गई और उन्हें चाय भी पिलाई गई। उनके अनुसार, यह इस बात का प्रमाण है कि सेक्रेटेरिएट में जाति के आधार पर भेदभाव की कोई नीति नहीं है।
उन्होंने बताया कि 29 जून को विधायक श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे थे, जहां बेअदबी से जुड़े कानून के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। जसकरण सिंह के दावे के अनुसार, उस समय कानून की कमियों को दूर करने और श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर विचार करने की बात कही गई थी। हालांकि, बाद में विधायक द्वारा मीडिया में दिए गए कुछ बयानों को उन्होंने आपत्तिजनक बताया।
प्रतिनिधिमंडल के आने की सूचना और प्रवेश को लेकर क्या कहा?
जसकरण सिंह के मुताबिक, विधायकों के प्रतिनिधिमंडल के आने की पूर्व सूचना और समय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। उन्होंने बताया कि सुबह डीपीआरओ इंदरजीत सिंह हरपुरा का फोन आया था कि कुछ विधायक श्री अकाल तख्त साहिब के सेक्रेटेरिएट पहुंचेंगे।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में प्रतिनिधिमंडल के आने का उद्देश्य स्पष्ट नहीं था। बाद में जानकारी मिली कि विधायक दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब में हुई घटना के संबंध में ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। इसके बाद उनके आने की अनुमति दी गई। जसकरण सिंह के अनुसार, दरबार साहिब परिसर में पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की जानकारी मिली और उसी दौरान ग्यासपुरा को प्रवेश से रोकने का फैसला लागू किया गया।
गुरुद्वारा बंगला साहिब मामले की भी होगी जांच
दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित तौर पर नारे लगाए जाने के मुद्दे पर भी जसकरण सिंह ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिब के अपने मर्यादित नियम और शिष्टाचार होते हैं, जिनका पालन सभी को करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुरुद्वारों के दरवाजे सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए खुले हैं। कोई भी व्यक्ति माथा टेकने, लंगर छकने या शरण लेने आ सकता है, लेकिन धार्मिक परिसर के भीतर राजनीतिक गतिविधियां करना या नारे लगाना गुरुद्वारे के शिष्टाचार के खिलाफ है।
जसकरण सिंह ने दावा किया कि उनके पास पहुंची कुछ तस्वीरों और वीडियो में प्रदर्शनकारी पोस्टर लेकर परिसर में प्रवेश करते और कथित तौर पर नारे लगाते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि परिसर में ऐसी गतिविधियां हुई हैं या पुलिस ने अंदर प्रवेश किया है, तो संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी की जांच होनी चाहिए।
उनके मुताबिक, इस मामले में सौंपे गए ज्ञापन को जत्थेदार साहिब के ध्यान में लाया गया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी से भी जवाब मांगा जा सकता है और मामले की जांच श्री अकाल तख्त साहिब के स्तर पर करवाई जा सकती है।
ग्यासपुरा से माफी की मांग, कार्रवाई की चेतावनी
जसकरण सिंह ने विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा से श्री अकाल तख्त साहिब, सिख पंथ और सम्मानित सिख संस्थाओं के बारे में कथित आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के लिए माफी मांगने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विधायक माफी नहीं मांगते हैं, तो जत्थेदार साहिब के आदेश के अनुसार आने वाले दिनों में उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे निज्जर साहिब और अन्य विधायकों से इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा गया था। जसकरण सिंह के अनुसार, यदि वे अपना पक्ष नहीं रखते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, इस पूरे विवाद में जसकरण सिंह ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को नकारते हुए प्रवेश रोकने के फैसले को कथित आपत्तिजनक बयानों से जोड़ा है। विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा का इस पूरे मामले पर पक्ष सामने आने के बाद विवाद की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
कादियां में 500 डेरों की सड़कों पर विवाद, गुर इकबाल सिंह माहल ने प्रताप बाजवा पर लगाए आरोप
गुरदासपुर जिलें के कादियां में करीब 500 डेरों की सड़कों के निर्माण को लेकर विवाद। AAP नेता गुर इकबाल सिंह माहल ने प्रताप सिंह बाजवा पर विकास कार्य रोकने की कोशिश के आरोप लगाए।
गुरदासपुर / कादियां / सत्ता संदेश
पंजाब के गुरदासपुर जिलें के कादियां विधानसभा क्षेत्र में करीब 500 डेरों की सड़कों के निर्माण को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज गुर इकबाल सिंह माहल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा पर विकास कार्यों को रुकवाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
गुर इकबाल सिंह माहल ने दावा किया कि कादियां क्षेत्र में करीब 500 डेरों तक सड़कों के निर्माण के लिए पंजाब सरकार की ओर से फंड जारी किया जा चुका है और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सड़कों के निर्माण को रोकने के लिए प्रताप सिंह बाजवा के करीबी वकील की ओर से माननीय हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
माहल ने कहा कि यदि हाई कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सड़क निर्माण कार्य रुकता है, तो इससे सैकड़ों परिवार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इसके लिए प्रताप सिंह बाजवा को जिम्मेदार ठहराया। माहल ने यह भी आरोप लगाया कि इन विकास कार्यों से आम आदमी पार्टी को राजनीतिक लाभ मिलने की आशंका के चलते इन्हें रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान माहल ने प्रताप सिंह बाजवा के अनाज मंडियों के दौरे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बाजवा हाल ही में अपने साथियों के साथ कादियां विधानसभा क्षेत्र की अलग-अलग अनाज मंडियों में पहुंचे और वहां सरकार के खिलाफ प्रचार किया। माहल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बाजवा की ओर से लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं।
गौरतलब है कि 500 डेरों की सड़कों के निर्माण और हाई कोर्ट में कथित तौर पर दायर याचिका को लेकर लगाए गए आरोपों पर प्रताप सिंह बाजवा का पक्ष सामने आना बाकी है। याचिका की वास्तविक स्थिति और अदालत के आदेशों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा
कुलतार सिंह संधवां का BJP पर निशाना, CBI रेड को बताया चुनावी रणनीति
पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने CBI रेड को लेकर BJP पर निशाना साधा। दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और पंजाब विधानसभा के 22 से 27 अक्टूबर तक प्रस्तावित सत्र पर भी बयान दिया।
लुधियाना / सत्ता संदेश
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने राज्य में CBI की कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे चुनाव से पहले की राजनीतिक रणनीति करार दिया। लुधियाना के एक निजी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे संधवां ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कई राजनीतिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
संधवां ने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह की कार्रवाई BJP की रणनीति है। हाई कोर्ट के आदेशों को लेकर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे आदेश चुनाव से पहले ही क्यों सामने आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि BJP इस तरह की रणनीति से चुनाव नहीं जीत सकती और उसे उतनी ही सफलता मिलेगी, जितनी उसके प्रयासों के अनुरूप होगी।
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी संधवां ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शन लोकतंत्र को बचाने के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल युवाओं की शिक्षा और उनकी भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि यदि लोग ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं, तो इस पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई गलती हुई है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं, पंजाब विधानसभा के आगामी सत्र को लेकर संधवां ने बताया कि विधानसभा का सत्र 22 से 27 अक्टूबर तक निर्धारित किया गया है। इस सत्र के दौरान राज्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
Rajbir Singh Ghumman CBI Case : भगवंत मान के OSD राजबीर घुम्मन ने CBI रेड को हाईकोर्ट में दी चुनौती
Rajbir Singh Ghumman CBI Case : पंजाब CM भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन ने CBI की FIR और घराचों में छापेमारी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देकर जांच पर रोक की मांग की।
पंजाब / सत्ता संदेश
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मन ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दर्ज FIR और उनके पैतृक निवास पर की गई छापेमारी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। वकील गिन्नीजीत मल्होत्रा के माध्यम से दायर सिविल रिट याचिका में घुम्मन ने CBI की जांच पर तत्काल रोक लगाने और किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा देने की मांग की है।
धारा 17A के तहत मंजूरी नहीं लेने का आरोप
याचिका में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि CBI ने जांच शुरू करने से पहले आवश्यक पूर्व मंजूरी नहीं ली। याचिकाकर्ता के अनुसार, यदि किसी लोक सेवक के खिलाफ उसकी आधिकारिक भूमिका या निर्णय से जुड़े कथित अपराध की जांच की जानी है, तो कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी आवश्यक हो सकती है।
घुम्मन का आरोप है कि इस मामले में पंजाब सरकार से ऐसी मंजूरी प्राप्त नहीं की गई। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट से मांग की है कि वैधानिक मंजूरी मिलने तक CBI की जांच और उससे जुड़ी कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई जाए।
हाईकोर्ट से की तीन प्रमुख मांगें
OSD राजबीर सिंह घुम्मन ने अपनी याचिका में तीन प्रमुख राहतों की मांग की है। पहली, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत आवश्यक मंजूरी मिलने तक FIR और जांच की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई जाए।
दूसरी, याचिका पर सुनवाई लंबित रहने के दौरान CBI को उनके खिलाफ गिरफ्तारी सहित किसी भी तरह की दबावपूर्ण कार्रवाई करने से रोका जाए।
तीसरी, संगरूर जिले के घराचों गांव में 6 अक्टूबर को की गई तलाशी और जब्ती की कार्रवाई तथा चंडीगढ़ की विशेष अदालत द्वारा जारी सर्च वारंट को गैरकानूनी घोषित कर रद्द किया जाए।
फिलहाल, याचिका में लगाए गए आरोप और मांगी गई राहतें याचिकाकर्ता का पक्ष हैं। हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में क्या आदेश दिया जाता है, यह आगे की न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

